अपनी तन्हाई का साहिब, हमें मलाल नहीं

पर आइना देखता है मुझे, मेरी परछाई के बिना ..

रंज-ओ-गम के जानिब, हमें कोई शिकवा ना कोई गिला,

मुस्कुराते चेहरों पे भी तो, नूर-ए-अश्क उतर आते हैं ..

कसम है मुझको के, जो कभी जेहन में मेरे ख्याल आ जाए उनका,

चाक-ए-दिल करके देखा तो, उनका ही चेहरा नज़र आता है

न लिखेंगे, न लायेंगे, जुबां पर उनका नाम,

मेरी बेबसी तो देखो साहिब,

मेरे हर ज़र्रे में उनका ही नाम आता है,

उनके सज़दे में झुकता है सर बार-बार इस नमाज़ी का,

उनकी बेवफाई को हमने, खुदाई का नाम दे रक्खा है

Love – Ashish..

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